Noise Pollution In Hindi Essay In Hindi

मानव स्वास्थ्य के लिए शोर अथवा ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या का रूप धारण करता जा रहा है | कोलाहलपूर्ण वातावरण ,ऊतम स्वास्थ्य की प्राप्ति में शत्रु है | अवांछित ध्वनि से शिशु चौककर जाग उठता है , चिल्लाने लगता है , रोगी अस्पताल से अनचाही आवाज से व्यथित हो जाता है उसकी निद्रा भंग हो जाती है तथा तीव्र ध्वनि तनाव उत्पन्न करती है | किन्तु शोर को परिभाषित करना कठिन है क्योंकि ध्वनि के प्रति हर व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग अलग हो सकता है | उदाहरनार्थ – ट्रेन की ध्वनि , पॉप संगीत ,शास्त्रीय संगीत ,बस का हॉर्न इत्यादि से उत्पन्न ध्वनि  , ट्रेन ड्राईवर ,संगीत प्रेमी ,बस चालक इत्यादि के लिए एक विशेष परिपेक्ष्य में होती है जबकि अन्य व्यक्ति इसे ध्वनि प्रदुषण कह सकते है |

शोर एक ऐसी ध्वनि है जिसकी अवांछनीयता का निर्धारण समय एवं स्थान से होता है अर्थात गलत समय एवं गलत स्थान पर एक अनचाही आवाज शोर (Noise) है वर्तमान में शोर के स्थान पर ध्वनि प्रदुषण Sound Pollution शब्द प्रयुक्त किया जाता है |

ध्वनि प्रदुषण के स्त्रोत | Sources of Noise Pollution or Sound Pollution

  • घरेलू स्त्रोत  – रसोईघर में खटपट , रेडिओ , टीवी से उत्पन्न शोर एवं गृह कलह , डांट-डपट , चीख चिल्लाहट , रोना-चिल्लाना |
  • औधौगिक स्त्रोत – कल कारखानों ,व्यावसायिक संस्थानों से उत्पन्न शोर |
  • राजनैतिक स्त्रोत  – धरने , प्रदर्शन , नारेबाजी , चुनाव प्रसार , जुलुस ,रैलियों से उत्पन्न ध्वनि प्रदुषण |
  • यातायात एवं परिवहन स्त्रोत  – सडको पर दौड़ते हुए वाहन ,ट्रेन ,वायु यातायात अन्य स्वचलित वाहनों की ध्वनि तथा हॉर्न की आवाज , धार्मिक कार्यो हेतु लाउडस्पीकर का अति प्रयोग भी कष्टकारी शोर उत्पन्न करता है |
  • अस्पतालों में ध्वनि प्रदुषण के स्त्रोत – ट्रोली ,व्हील चेयर की खडखड़ाहट , उपकरणों ,ऑक्सीजन सिलेण्डरो ,संयत्रों से उत्पन्न ध्वनि , जूतों के चलने की आवाज ,कार्मिको ,रोगियों ,संबधियो का अनियंत्रित वार्तालाप ,आपातकालीन भागदौड़ एवं चीख चिल्लाहट से उत्पन्न शोर , मृत्यु उपरांत करुण रुदन |
  • आतिशबाजी – वैवाहिक समारोहों , त्योहारों , मेलो और उत्सवो में अनियंत्रित आतिशबाजी , मैच या चुनाव की जीत में होने वाली आतिशबाजी ,

ध्वनि प्रदुषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुप्रभाव | Noise Pollution or Sound Pollution Effect of Health

  • अस्थायी या स्थायी तौर पर श्रवण शक्ति की क्षीणता
  • वार्तालाप में बाधा ,खीझ ,चिडचिडाहट उत्पन्न होना
  • कार्यक्षमता में कमी , तनाव बढना
  • अनिद्रा ,उच्च रक्तचाप ,दृष्टिदोष ,चक्कर आना ,अधिक पसीना आना ,थकावट आदि

ध्वनि प्रदुषण को मापना |

ध्वनि प्रदुषण , ध्वनि की तीव्रता (Loudness) एवं आवृति (Frequency) पर निर्भर है | शोर की तीव्रता को Decibels या dB में नापते है | व्यक्ति अधिकतम 85 डेसिबल तक शोर सहन कर सकता है इसके बाद श्रवण शक्ति को क्षति पहुच सकती है | चिकित्सालयों में 20-25 Decibel तक ध्वनि प्रदुषण स्वीकार्य है | ध्वनि की आवृति Hertz या Hz में व्यक्त की जाती है | व्यक्ति 20 Hertz से 2000 Hertz की आवृतिया सुन सकता है |

ध्वनि प्रदुषण की रोकथाम | Prevention from Noise Pollution or Sound Pollution in Hindi

  • मशीन एवं उपकरणों से उत्पन्न शोर पर नियन्त्रण
  • संगीत उपकरणों की ध्वनि नियंत्रित करना
  • श्रमिको ,व्यक्तियों के लिए सुरक्षात्मक साधनों (इयर प्लग आदि ) का प्रयोग
  • सार्वजनिक स्थानों पर (अस्पताल ,शिक्षण संस्थान आदि ) Horn पर प्रतिबंध लगाना
  • शोर की सीमा तय करना तथा कानूनी प्रावधानों द्वारा ध्वनि प्रदुषण पर नियन्त्रण
  • ध्वनि अवशोषक पदार्थ का , मकान एवं अस्पताल निर्माण में उपयोग करना
  • सडको के किनारे हरे पेड़ लगाने से ध्वनि प्रदुषण की तीव्रता कम होती है
  • स्वैच्छिक संस्थानों एवं जन सहयोग हेतु स्वास्थ्य शिक्षा देना
  • अस्पतालों में ध्वनिरोधी सांगरी का उपयोग करना तथा चिकित्सालय में ध्वनि प्रदुषण के स्त्रोतों पर नियन्त्रण करना

भारत में ध्वनि प्रदूषण कई मायनों में मानव जीवन को प्रभावित करने वाली कई बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है। हमें ध्वनि प्रदूषण के कारकों, प्रभावों और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसके प्रभावों को रोकने के उपायों को जानना चाहिये। स्कूल के बच्चों को सामान्य तौर यह विषय किसी भी प्रतियोगिता में जैसे निबंध लेखन प्रतियोगिता आदि में अपने विचारों को लिखने के लिये दिया जाता है। हम नीचे कुछ आसानी से लिखे ध्वनि प्रदूषण के निबंध विभिन्न समय सीमाओं में उपलब्ध करा रहे हैं। आप अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार कोई भी निबंध चुन सकते हैं।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (नॉइज़ पोल्लुशन एस्से)

You can find below some essays on Noise Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण प्रदूषण के रुप में पर्यावरण को बड़े स्तर पर विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से हानि पहुंचाने वाले तत्वों के रुप में माना जाता है। ध्वनि प्रदूषण को ध्वनि अव्यवस्था के रुप में भी जाना जाता है। अत्यधिक शोर स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है और मानव या पशु जीवन के लिए असंतुलन का कारण है। यह भारत में व्यापक पर्यावरणीय मुद्दा है जिसे सुलझाने के लिये उचित सतर्कता की आवश्यकता है, हालांकि, यह जल, वायु, मृदा प्रदूषण आदि से कम हानिकारक है।

बाहरी शोर मशीनों, परिवहन व्यवस्था, खराब शहरी योजना (साइड वाई साइड औद्योगिक और रिहायशी इमारतों का निर्माण) आदि के द्वारा होता है। इंडोर शोर के स्रोत घरेलू मशीनों, निर्माण गतिविधियों, तेज आवाज में संगीत, आदि के द्वारा होता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा हानि कान के पर्दे खराब हो जाने के कारण हमेशा के लिये सुनने की क्षमता का चले जाना है।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द)

ध्वनि के सामान्य स्तर को दैनिक जीवन में बनाये रखना बहुत आवश्यक है, हालांकि, अवांछित शोर या ध्वनि जो लोगों, जानवरों या पेड़-पौधों के द्वारा असहनीय होती है पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती है। शोर को सामान्यतः कई औद्योगिक या गैर औद्योगिक स्त्रोतों के द्वारा अवांछित आवाज को कहा जाता है जो हमारे चारों ओर दैनिक जीवन में उत्पन्न होती है। उच्च स्तर ध्वनि अप्रिय प्रभाव पैदा करती है और विशेष रूप से कानों के स्वास्थ्य को असुविधा उत्पन्न करती है।

अवांछित आवाज हमारी दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों में जैसे; रात को सोना, वार्तालाप करते समय, सुनने की क्षमता, आराम करने, आदि में व्यवधान उत्पन्न करती है। जलीय जीव भी समुद्र में पनडुब्बियों और बड़े जहाजों के द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित होते हैं। जंगली जानवर भी लकड़ी की कम्पनियों के द्वारा चैन-शो संचालन (बहुत ज्यादा शोर उत्पन्न करने वाली) के दौरान उत्पन्न आवाज से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। ध्वनि प्रदूषण के सामान्य स्त्रोत घरेलू गैजेट, परिवहन के साधन, जेट प्लेन्स, हैलिकॉप्टर, औद्योगिक मशीनों से निकलने वाली आवाज आदि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उद्योगों को अपनी उत्पादन आवाज 75डीबी तक सीमित करनी चाहिये।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण वो प्रदूषण है जो उच्च और असुरक्षित स्तर तक ध्वनि के कारण पर्यावरण में लोगों में बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का, पशुओं, पक्षियों और पेड़ों आदि की असुरक्षा का कारण बनता है। ध्वनि प्रदूषण से होने वाली बहुत ही सामान्य समस्या बीमारी से संबंधी चिन्ता, बेचैनी, बातचीत करने में समस्या, बोलने में व्यवधान, सुनने में समस्या, उत्पादकता में कमी, सोने के समय व्यवधान, थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, घबराहट, कमजोरी, ध्वनि की संवेदन शीलता में कमी जिसे हमारे शरीर की लय बनाये रखने के लिये हमारे कान महसूस करते हैं, आदि। यह लंबी समयावधि में धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को कम करता है। ऊंची आवाज में लगातार ढोल की आवाज सुनने से कानों को स्थायी रुप से नुकसान पहुंचता है।

उच्च स्तर की ध्वनि उपद्रव, चोट, शारीरिक आघात, मस्तिष्क में आन्तरिक खून का रिसाव, अंगों में बड़े बुलबुले और यहां तक कि समुद्री जानवरों मुख्यतः व्हेल और डॉलफिन आदि की मृत्यु का कारण बनती है क्योंकि वो बातचीत करने, भोजन की खोज करने, अपने आपको बचाने और पानी में जीवन जीने के लिये अपने सुनने की क्षमता का ही प्रयोग करती हैं। पानी में शोर का स्त्रोत जल सेना की पनडुब्बी है जिसे लगभग 300 माल दूरी से महसूस किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण के परिणाम बहुत अधिक खतरनाक है और निकट भविष्य में चिंता का विषय बन रहे हैं। ध्वनि प्रदूषण के कई निवारक उपाय हैं जैसे, उद्योगों में साउड प्रूफ कमरों के निर्माण को बढ़ावा देना, उद्योग और कारखानें आवासीय इमारत से दूर होनी चाहिए, मोटरसाइकिल के खराब हुये पाइपों की मरम्मत, शोर करने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, हवाई अड्डों, बस, रेलवे स्टेशनों और अन्य परिवहन टर्मिनलों का आवासीय स्थलों से दूर होना चाहिए, शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्पिटल्स के आसपास के इलाकों को आवाज-निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाये, सड़को पर शोर के कारण उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को अवशोषित करने के लिये रिहायसी इलाकों के आस-पास हरियाली लगाने की अनुमति देनी चाहिये।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 4 (250 शब्द)

वातावरण में ध्वनि प्रदूषण तेज वांछित आवाज के कारण होता है जो दर्द का कारण बनता है। ध्वनि प्रदूषण के कुछ मुख्य स्त्रोत सड़क पर यातायात के द्वारा उत्पन्न शोर, निर्माणकार्य (भवन, सड़क, शहर की गलियों, फ्लाई ओवर आदि) के कारण उत्पन्न शोर, औद्योगिक शोर, दैनिक जीवन में घरेलू उत्पादकों (जैसे घरेलू सामान, रसोइ घर का सामान, वैक्यूम क्लीनर, कपड़े धोने की मशीन, मिक्सी, जूसर, प्रेसर कूकर, टीवी, मोबाइल, ड्रायर, कूलर आदि) से उत्पन्न शोर, आदि हैं।

कुछ देशों में (बहुत अधिक जनसंख्या वाले शहर जैसे भारत आदि) खराब शहरी योजना ध्वनि प्रदूषण में मुख्य भूमिका निभाती है क्योंकि इसकी योजना में बहुत छोटे घरों का निर्माण किया जाता है जिसमें कि संयुक्त बड़े परिवार के लोग एक साथ रहते हैं (जिसके कारण पार्किंग के लिये झगड़ा, आधारभूत आवश्यकताओं के लिये झगड़ा होता है आदि।), जो ध्वनि प्रदूषण का नेतृत्व करता है। आधुनिक पीढ़ी के लोग पूरी आवाज में गाना चलाते हैं और देर रात तक नाचते हैं जो पड़ौसियों के लिये बहुत सी शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बनता है। अधिक तेज आवाज सामान्य व्यक्ति की सुनने की क्षमता को हानि पहुँचाती है। अधिक तेज आवाज धीरे-धीरे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और एक धीरे जहर के रुप में कार्य करती है।

यह जंगली जीवन, पेड़-पौधों के जीवन और मनुष्य जीवन को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है। सामान्यतः, हमारे कान एक निश्चित ध्वनि की दर को बिना कानों को कोई हानि पहुंचाये स्वीकार करते हैं। हालांकि, हमारे कान नियमित तेज आवाज को सहन नहीं कर पाते और जिससे कान के पर्दें बेकार हो जाते हैं जिसका परिणाम अस्थायी या स्थायी रुप से सुनने की क्षमता की हानि होता है। इसके कारण और भी कई परेशानी होती हैं जैसे: सोने की समस्या, कमजोरी, अनिद्रा, तनाव, उच्च रक्त दाब, वार्तालाप समस्या आदि।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 5 (300 शब्द)

पर्यावरण में बहुत प्रकार के प्रदूषण हैं, ध्वनि प्रदूषण, उनमें से एक है, और स्वास्थ्य के लिये बहुत खतरनाक है। यह बहुत ही खतनराक हो गया है कि इसकी तुलना कैंसर आदि जैसी खतरनाक बीमारियों से की जाती है, जिससे धीमी मृत्यु निश्चित है। ध्वनि प्रदूषण आधुनिक जीवन और बढ़ते हुये औद्योगिकीकरण व शहरीकर का भयानक तौहफा है। यदि इसे रोकने के लिये नियमित और कठोर कदम नहीं उठाये गये तो ये भविष्य की पीढियों के लिये बहुत गंभीर समस्या बन जायेगा। ध्वनि प्रदूषण वो प्रदूषण है जो पर्यावरण में अवांछित ध्वनि के कारण उत्पन्न होता है। यह स्वास्थ्य के लिये बहुत बड़ा जोखिम और बातचीत के समय समस्या का कारण बनता है।

उच्च स्तर का ध्वनि प्रदूषण बहुत से मनुष्यों के व्यवहार में चिडचिड़पन लाता है विशेषरुप से रोगियों, वृद्धों और गर्भवति महिलाओं के व्यवहार में। अवांछित तेज आवाज बहरेपन और कान की अन्य जटिल समस्याओं जैसे, कान के पर्दों का खराब होना, कान में दर्द, आदि का कारण बनती है। कभी-कभी तेज आवाज में संगीत सुनने वालों को अच्छा लगता है, बल्कि अन्य लोगों को परेशान करता है। वातावरण में अनिच्छित आवाज स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होती है। कुछ स्त्रोत ऐसे है जो ध्वनि प्रदूषण में मुख्य रुप से भाग लेते हैं जैसे उद्योग, कारखानें, यातायात, परिवहन, हवाई जहाज के इंजन, ट्रेन की आवाज, घरेलू उपकरणों की आवाज, निर्माणकार्य आदि।

60 डीबी आवाज को सामान्य आवाज माना जाता है, हालांकि, 80 डीबी या इससे अधिक आवाज शारीरिक दर्द का कारण और स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होती है। वो शहर जहां ध्वनि की दर 80 डीबी से अधिक हैं उनमें से दिल्ली (80 डीबी), कोलकत्ता (87 डीबी), मुम्बई (85 डीबी), चेन्नई (89 डीबी) आदि हैं। पृथ्वी पर जीवन जीने के लिये अपने स्तर पर शोर को सुरक्षित स्तर तक कम करना बहुत आवश्यक हो गया है क्योंकि अवांछित शोर मनुष्यों, पेड़-पौधो, और जानवरों के भी जीवन को प्रभावित करता है। ये लोगों में ध्वनि प्रदूषण, इसके मुख्य स्त्रोत, इसके हानिकारक प्रभावों के साथ ही इसे रोकने के उपायों बारे में सामान्य जागरुकता लाकर संभव किया जा सकता है।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 6 (400 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण उस स्थिति में उत्पन्न होता है जब पर्यावरण में आवाज का स्तर सामान्य स्तर से बहुत अधिक होता है। पर्यावरण में अत्यधिक शोर की मात्रा जीने के उद्देश्य से असुरक्षित है। कष्टकारी आवाज प्राकृतिक सन्तुलन में बहुत सी परेशानियों का कारण बनती है। तेज आवाज या ध्वनि अप्राकृतिक होती है और अन्य आवाजों के बाहर जाने में बाधा उत्पन्न करती है। आधुनिक और तकनीकी के इस संसार में, जहां सब कुछ घर में या घर के बाहर बिजली के उपकरणों से संभव है, ने तेज ध्वनि के खतरे के अस्तित्व में वृद्धि कर दी है।

भारत में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण की बढ़ती हुई मांग लोगों में अवांछित आवाज के प्रदर्शन का कारण हैं। रणनीतियों का समझना, योजना बनाना और उन्हें प्रयोग करना ध्वनि प्रदूषण को रोकना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वो आवाज जिसका हम प्रतिदिन निर्माण करते हैं जैसे, तेज संगीत सुनना, टीवी, फोन, मोबाइल का अनावश्यक प्रयोग, यातायात का शोर, कुत्ते का भौंकना, आदि ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्त्रोत शहरी जीवन का एक अहम हिस्सा होने के साथ ही सबसे ज्यादा परेशान करने वाले, सिर दर्द, अनिद्रा, तनाव आदि कारण बनता हैं। ये चीजें दैनिक जीवन के प्राकृतिक चक्र को बाधित करती हैं, वो खतरनाक प्रदूषक कहलाते हैं। ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोत, कारक और प्रभाव निम्नलिखित हैं:

ध्वनि प्रदूषण के कारक या कारण

  • औद्योगिकीकरण ने हमारे स्वास्थ्य और जीवन को खतरे पर रख दिया है क्योंकि सभी (बड़े या छोटे) उद्योग मशीनों का प्रयोग करते हैं जो बहुत ज्यादा मात्रा में तेज आवाज पैदा करती है। कारखानों और उद्योगों में प्रयोग होने वाले अन्य उपकरण (कम्प्रेशर, जेनरेटर, गर्मी निकालने वाले पंखे, मिल) भी बहुत शोर उत्पन्न करते हैं।
  • सामान्य सामाजिक उत्सव जैसे शादी, पार्टी, पब, क्लब, डिस्क, या पूजा स्थल के स्थान मन्दिर, मस्जिद, आदि आवासीय इलाकों में शोर उत्पन्न करते हैं।
  • शहरों में बढ़ते हुए यातायात के साधन (बाइक, हवाई जहाज, अंडर ग्राउंड ट्रेन आदि) तेज शोर का निर्माण करते हैं।
  • सामान्य निर्माणी गतिविधियाँ (जिसमें खानों, पुलों, भवनों, बांधो, स्टेशनों, आदि का निर्माण शामिल है), जिसमें बड़े यंत्र शामिल होते हैं उच्च स्तर का शोर उत्पन्न करते हैं।
  • दैनिक जीवन में घरेलू उपकरणों का उपयोग ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

  • ध्वनि प्रदूषण से बहुत सी सुनने की समस्याएं (कान के पर्दों का खराब होना और स्थायी रुप से सुनने की क्षमता का ह्रास होना) अवांछित आवाज के कारण होती हैं।
  • यह कानों की ध्वनि संवेदनशीलता को कम करता है जो शरीर नियंत्रित रखने में सहायक होती है।
  • जंगली जानवरों के जीवन को प्रभावित करके उन्हें बहुत आक्रामक बनाता है।

रोकने के उपाय

पर्यावरण में असुरक्षित आवाज के स्तर को नियंत्रित करने के लिये लोगों के बीच में सामान्य जागरुकता को बढ़ाना चाहिये और प्रत्येक के द्वारा सभी नियमों को गंभीरता से माना जाना चाहिये। घर में या घर के बाहर जैसे: क्लब, पार्टी, बार, डिस्को आदि में अनावश्यक शोर उत्पन्न करने वाले उपकरणों के प्रयोग को कम करना चाहिये।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 7 (800 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण वो औद्योगिक या गैर-औद्योगिक क्रियाएं हैं जो मनुष्य, पौधो और पशुओं के स्वास्थ्य पर बहुत से आयामों से विभिन्न ध्वनि स्त्रोतों के द्वारा आवाज पैदा करके प्रभावित करती है। निरंतर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के स्तर ने वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के जीवन को बड़े खतरे पर रख दिया है। हम नीचे ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोतों, प्रभावों और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिये वैधानिक आयामों पर चर्चा करेंगे।

ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत निम्न लिखित हैं

भारत में बहुत अधिक ध्वनि प्रदूषण शहरीकरण, आधुनिक सभ्यता, औद्योगिकीकरण आदि के द्वारा बढ़ा है। ध्वनि का प्रसार औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोतों के कारण हुआ है। ध्वनि के औद्योगिक स्त्रोतों में तेज गति से काम करने वाली उच्च तकनीकी की बड़ी मशीनें और बहुत से उद्योगों में ऊंची आवाज पैदा करने वाली मशीनें शामिल हैं। ध्वनि पैदा करने वाले गैर-औद्योगिक स्त्रोतों में यातायत के साधन, परिवहन और अन्य मानव निर्मित गतिविधियाँ शामिल हैं। ध्वनि प्रदूषण के कुछ औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोत नीचे दिये गये हैं:

  • वायु सेना के एयर क्राफ्ट पर्यावरण में बहुत बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।
  • सड़क पर चलने वाले परिवहन के साधन दिन प्रति दिन मोटर वाहनों जैसे ट्रक, बसों, ऑटो, बाइक, वैयक्तिक कार आदि अधिक आवाज उत्पन्न करने लगें हैं। शहरों की बड़ी इमारतें अपने निर्माण के समय में कुछ समय के लिये अपने आस-पास के क्षेत्र में ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
  • विनिर्माण उद्योगों में मोटर और कम्प्रशेर, पंखे आदि के प्रयोग के कारण उत्पन्न औद्योगिक शोर।
  • बड़ी इमारतों, सड़को, हाई-वे, शहर की सड़कों आदि के निर्माण के समय हथौड़े, बुलडोजर, एयर कम्प्रेशर, डम्पिंग ट्रक, लोडर आदि के माध्यम से उत्पन्न निर्माणी ध्वनि।
  • रेल की पटरियों का शोर (ट्रेन के लोकोमोटिव इंजन, सीटी, हार्न, रेलवे फाटक को उठाते और गिराते समय) उच्च स्तर के शोर का निर्माण करने में बहुत प्रभावी होता है क्योंकि ये चरम सीमा की ध्वनि लगभग 120 डीबी से 100 फीट की दूरी तक की आवाज पैदा करते हैं।
  • इमारतों में प्लम्बिंग, जैनरेटर, ब्लोअर, घरेलू उपकरणों, संगीत, एयर कंडीशनर, वैक्यूम क्लिनर, रसोइघर के उपकरण, पंखों और अन्य गतिविधियों के कारण उत्पन्न शोर।
  • ध्वनि प्रदूषण का एक अन्य स्त्रोत विभिन्न किस्मों के पटाखों का त्योहारों और अन्य पारिवारिक उत्सवों के दौरान प्रयोग है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव निम्नलिखित हैं

ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों, जानवरों और सम्पत्ति के स्वास्थ्य को बहुत अधिक प्रभावित करता है। उनमे से कुछ निम्न है:

  • दिन प्रति दिन बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों की काम करने की क्षमता और गुणवत्ता को कम करता है।
  • ध्वनि प्रदूषण थकान के कारण एकाग्रता की क्षमता को बड़े स्तर पर कम करता है।
  • गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है और चिड़चिड़ेपन और गर्भपात का कारण बनता है।
  • लोगों में बहुत सी बीमारियों (उच्च रक्तदाब और मानसिक तनाव) का कारण होता है क्योंकि मानसिक शान्ति को भंग करता है।
  • तेज आवाज काम की गुणवत्ता को कम करती है और जिसके कारण एकाग्रता का स्तर कम होता है।
  • यदि आवाज का स्तर 80 डीबी से 100 डीबी हो तो यह लोगों में अस्थायी या स्थायी बहरेपन का कारण बनता है।
  • यह ऐतिहासिक इमारतों, पुरानी इमारतों, पुलों आदि को हानि पहुंचाता है क्योंकि ये संरचना में बहुत कमजोर होती है और तेज ध्वनि खतरनाक तरंगों का निर्माण करती है जो उनकी दिवारों को हानि पहुंचाती है।
  • पशु अपने मस्तिष्क पर अपना नियंत्रण खो देते हैं और बहुत खतरनाक हो जाते हैं क्योंकि तेज आवाज उनके नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को प्रभावित करती है।
  • यह पेड़-पौधों को भी प्रभावित करता है और जिसके कारण खराब किस्म का उत्पादन होता है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिये वैधानिक कदम निम्नलिखित है:

  • भारत के संविधान ने जीवन जीने, सूचना प्राप्त करने, अपने धर्म को मानने और शोर करने के अधिकार प्रदान किये हैं।
  • धारा 133 ने नागरिकों को शक्ति प्रदान की हैं कि वो सशर्त और स्थायी आदेश पर पब्लिक प्रदर्शन को हटा सकती है।
  • पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1996 के अन्तर्गत ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम 2000 को ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती हुई समस्या को नियंत्रित करने के लिये शामिल किया है।
  • ध्वनि की कमी और तेल की मशीनरी का कारखाना अधिनियम कार्यस्थल पर शोर को नियंत्रित करता है।
  • मोटर वाहन अधिनियम हार्न और खराब इंजन के इस्तेमाल को शामिल करता है।
  • भारतीय दंड संहिता ध्वनि प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों से संबंधित है। किसी को भी ट्रोट कानून के अन्तर्गत दंडित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

ध्वनि प्रदूषण ने इसके स्त्रोत, प्रभाव और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपायों के बारे में सामान्य जागरुकता की तत्काल आवश्यकता का निर्माण किया है। कार्यस्थल, शैक्षणिक संस्थान, आवासीय क्षेत्र, अस्पताल आदि स्थानों पर ध्वनि का तेज स्तर रोका जाना चाहिये। युवा बच्चों और विद्यार्थियों को तेज आवाज करने वाली गतिविधियों जैसे; किसी भी अवसर पर तेज आवाज पैदा करने वाले उपकरणों और यंत्रो का प्रयोग आदि में शामिल न होने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। तेज आवाज करने वाले पटाखों के विशेष अवसरों जैसे; त्योहारों, पार्टियों, शादियों, आदि में प्रयोग को कम करना चाहिये। ध्वनि प्रदूषण से संबंधित विषयों को पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जाये और विद्यालय में विभिन्न गतिविधियों जैसे लेक्चर, चर्चा आदि को आयोजित किया जा सकता है, ताकि नयी पीढ़ी अधिक जागरुक और जिम्मेदार नागरिक बन सके।


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